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Showing posts from January, 2019

Mai kon

कुछ दिन पहले मै अपने पापा के साथ प्रिंटिंग प्रेस में गया था मेरे पापा वहीं काम करते है मै कंपनी के गेट पर खड़ा था मैंने देखा कि अंकित भैया वहां से बाहर निकल रहे थे अंकित भैया क...

Mai chahta hu

मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...

Naam mai kya rakha hai.

अक्सर ये वाक्या सुनने में आता है कि नाम में क्या रखा है ? मेरा एक दोस्त है श्याम चतुर्वेदी उसकी कहानी सुनकर आप अगली बार से नाम में क्या रखा है नहीं बोलेंगे जब उसका जन्म हुआ तो ए...