कुछ दिन पहले मै अपने पापा के साथ प्रिंटिंग प्रेस में गया था मेरे पापा वहीं काम करते है मै कंपनी के गेट पर खड़ा था मैंने देखा कि अंकित भैया वहां से बाहर निकल रहे थे अंकित भैया कंपनी के मालिक है।
मैने उन्हे नमस्ते कहा
उन्होंने मुझसे भौहे उचकाकर पूछा "कौन?"
मैंने जवाब दिया "सोनू"
उन्होंने फिर पूछा "सोनू कौन "
मै खुद में बड़बड़ाया सोनू कौन असल में मै खुद से पूछ रहा था सोनू कौन ?
थोड़ा समय लेकर मैंने फिर से जवाब दिया "सुनील कुमार का बेटा" ये सुनकर भैया वहां से चल दिए
पर ये सवाल मेरे साथ ही रह गया कि मै कौन हूं आखिर कब तक हम अपने पापा के परिचय से अपना परिचय जोड़ेंगे और क्या मेरी पहचान मेरे नाम तक ही सीमित है
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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