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Dikkat

मुझे दिक्कत है उन लोगों से जो मुझे मेरी मात्रभाषा में बात करने पर देसी बोलते है
मुझे दिक्कत होती है जब अलग दिखने के कारण लोग मुझे ट्रोल कर देते है
मुझे दिक्कत है उन लोगों से जो आपसे बात करने से पहले आपके कपड़ों की ओर देखते है
मुझे दिक्कत है उन लोगों से जो मेरी शक्ल को देखकर मेरे ज्ञान का आकलन करते है
मुझे दिक्कत है उन लोगों से जो रास्ते पर चलते समय सिर्फ इसलिए दूरी बना लेते है क्योंकि साथ चलने वाले व्यक्ति के कपड़े थोड़े गंदे है
मुझे दिक्कत है उन सो कॉल्ड अमीर लोगों से जो गरीबी और छूत की बीमारी मै अंतर नहीं जानते
मुझे दिक्कत है उन लोंगो से भी जो मुझे हमदर्दी का पात्र बना देते है
#let_us_live

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Mai chahta hu

मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...

ख्वाब का मारना

आओ तुम्हें एक ख्वाब को मरता हुआ दिखाऊं। वह चढ़ जाएगा अपनी ही बनाई किसी इमारत की छत पर और कूद जाएगा ठीक वहीं जहां तुम खड़े हो वह ठीक तुम्हारे सामने दम तोड़ देगा। या फिर ले आएगा कहीं से उम्मीदों का जहर और उसे खा कर इधर-उधर भागेगा इस उम्मीद में कि तुम उसे बचा लो लेकिन ऐसा नहीं होगा वह छोड़ देगा अपने शरीर को ढीला और उसका शरीर नीला पड़ जाएगा। या फिर वह अपनी उलझन को समेट कर उससे एक रस्सी बनाएगा और उसे अपनी गर्दन में डालकर झूल जाएगा थोड़ा छटपटाएगा और फिर मर जाएगा। या फिर आएगी रिश्तों की एक गाड़ी और उसे सड़क पर अकेला चलता देख उसे कुचल देगी और वह उसके बोझ तले दबकर मर जाएगा। अगर ऐसा ना हुआ तो वह गुमनामी के अंधेरे में चुपचाप बैठे बैठे नाउम्मीदी से धीरे धीरे खुद ही मर जाएगा बिना शोर किए,बिना कुछ कहे जैसा कि होता आया है हर बार बार बार