रात के 1:30 बज रहे हैं और मैं अपने रूम में बैठकर कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं हां मैं अक्सर इसी समय लिखता हूं और मुझे लिखने की कोई कारण चाहिए होता है आज रात लगभग 10:00 बजे जब मैं पंकज की शादी से आ रहा था तब मेरी नजर सड़क के साथ लगे होटल पार्क प्लाजा पर पड़ी मै कई बार इस होटल को देख चुका हूं पर आज यह बहुत अलग लग रहा था क्योंकि आमतौर पर मैं दिन में ही यहां से गुजरा करता था मैंने पहली बार इस होटल को रात के समय देखा है। इसलिए सोचा थोड़ा रुक कर देख लूं होटल काफी सुंदर दिख रहा था होटल में कई तरह की लाइटें लगी थी फिर मेरी नज़र होटल के गेट पर पड़ी अंदर खूब चकाचौंध थी रोशनी गेट के बाहर आ रही थी कुछ देर बाद एक स्त्री होटल के गेट पर आकर खड़ी हुई उसने सुनहरा गाउन पहन रखा था उसके ठीक पीछे एक पुरुष आया वे शायद अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे उनकी चटर पटर शुरू हुई मैने उन्हें नजरअंदाज किया और होटल पर फोकस किया। वे दोनों अब मेरे निकट आ रहे थ उन्हें लगा कि मै कोई शोहदा हूं जो कि उनको घूर रहा है मुझे असुविधा महसूस हुई सो मै वहां से चल दिया। एक दिन की बात है जब मै पार्क से क्रिकेट खेलकर अपने दोस्तो के...