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Khwahish

रात के 1:30 बज रहे हैं और मैं अपने रूम में बैठकर कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं हां मैं अक्सर इसी समय लिखता हूं और मुझे लिखने की कोई कारण चाहिए होता है आज रात लगभग 10:00 बजे जब मैं पंकज की शादी से आ रहा था तब मेरी नजर सड़क के साथ लगे होटल पार्क प्लाजा पर पड़ी मै कई बार इस होटल को देख चुका हूं पर आज यह बहुत अलग लग रहा था क्योंकि आमतौर पर मैं दिन में ही यहां से गुजरा करता था मैंने पहली बार इस होटल को रात के समय देखा है। इसलिए सोचा थोड़ा रुक कर देख लूं होटल काफी सुंदर दिख रहा था होटल में कई तरह की लाइटें लगी थी फिर मेरी नज़र होटल के गेट पर पड़ी अंदर खूब चकाचौंध थी रोशनी गेट के बाहर आ रही थी कुछ देर बाद एक स्त्री होटल के गेट पर आकर खड़ी हुई उसने सुनहरा गाउन पहन रखा था उसके ठीक पीछे एक पुरुष आया वे शायद अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे उनकी चटर पटर शुरू हुई मैने उन्हें नजरअंदाज किया और होटल पर फोकस किया। वे दोनों अब मेरे निकट आ रहे थ उन्हें लगा कि मै कोई शोहदा हूं जो कि उनको घूर रहा है मुझे असुविधा महसूस हुई सो मै वहां से चल दिया।
एक दिन की बात है जब मै पार्क से क्रिकेट खेलकर अपने दोस्तो के साथ घर आ रहा था तो मैं होटल पार्क प्लाजा को देखने के लिए रुक गया था उस वक़्त यह नया नया ही बना था। मेरे दोस्तो ने मुझे आवाज़ दी मैने उन्हे आगे चलने को कहा और होटल के गेट से भीतर देखने की कोशिश कीकुछ साफ नहीं दिख रहा था सो मैने थोड़ा निकट जाके देखने की कोशिश की तो पीछे से एक गार्ड ने मेरा कंधा थपथपाया। उसने पूछा "अंदर किसी को ढूंढ रहे हो कोई अंदर है क्या?"मैने कुछ नहीं कहा और वहां से चलने लगा तो उसने फिर पूछा "अंदर जाओगे"मैने नहीं मै सर हिलाया क्योंकि मेरे अंदर डर था कि कोई अगर मुझसे कुछ पूछेगा या मेरे कपड़ों पर कोई टिप्पणी करेगा तो मै क्या करूंगा। सो मै वहां से चल दिया
कई लोगो के लिए होटलों मै रहना एक साधारण बात होती है और कई लोगो के लिए ख्वाहिश

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आओ तुम्हें एक ख्वाब को मरता हुआ दिखाऊं। वह चढ़ जाएगा अपनी ही बनाई किसी इमारत की छत पर और कूद जाएगा ठीक वहीं जहां तुम खड़े हो वह ठीक तुम्हारे सामने दम तोड़ देगा। या फिर ले आएगा कहीं से उम्मीदों का जहर और उसे खा कर इधर-उधर भागेगा इस उम्मीद में कि तुम उसे बचा लो लेकिन ऐसा नहीं होगा वह छोड़ देगा अपने शरीर को ढीला और उसका शरीर नीला पड़ जाएगा। या फिर वह अपनी उलझन को समेट कर उससे एक रस्सी बनाएगा और उसे अपनी गर्दन में डालकर झूल जाएगा थोड़ा छटपटाएगा और फिर मर जाएगा। या फिर आएगी रिश्तों की एक गाड़ी और उसे सड़क पर अकेला चलता देख उसे कुचल देगी और वह उसके बोझ तले दबकर मर जाएगा। अगर ऐसा ना हुआ तो वह गुमनामी के अंधेरे में चुपचाप बैठे बैठे नाउम्मीदी से धीरे धीरे खुद ही मर जाएगा बिना शोर किए,बिना कुछ कहे जैसा कि होता आया है हर बार बार बार