आज मैंने यूट्यूब पर एक वीडियो देखी उसका टाइटल था होमोसेक्सुअलिटी उसमे एक व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 25 वर्ष रही होगी।उसने यह कहा कि "आज हम होमोसेक्सुअलिटी यानी समलैंगिकता पर बात करेंगे" और फिर उसने हस्ते हुए ये सफाई दी "मै गे नहीं हूं मै स्ट्रेट हूं" इतना सुनकर मैंने वीडियो बंद कर दी क्या यह दोहरी मानसिकता नहीं है कि एक अोर खुले विचारों को समर्थन देते है और दूसरी ओर इस तरह की सफाई देते हैं मैंने पढ़ा था कि जब गांधी जी चंपारण आंदोलन के दौरान डॉ राजेंद्र प्रसाद मिलने उनके घर गए थे और उनकी अनुपस्थिति में उनके नोकरों ने गांधी जी को कुएं से पानी लेने से मना कर दिया था ।क्योंकि वे समझते थे कि गांधीजी नीची जाति के है। तब गांधीजी भी चाहते तो यह सफाई दे सकते थे कि मै नीची जाति का नहीं हूं पर उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनका मानना था कि ऐसा करने से लोगों में यह संदेश जाएगा कि गांधीजी भी जाति व्यवस्था में विश्वास करते है
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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