मेरे साथ एक और घटना हुई। वो "शायदा" थी हम लोग एक ही कोचिंग में पढ़ते थे पर हमारा बैच अलग था मै अक्सर समय से पहले ही कोचिंग पहुंच जाया करता था शोएब भी मेरे साथ कोचिंग ही कोचिंग पढ़ता था शायदा अक्सर र्कोचिंग से निकलते समय मेरी ओर देखा करती थी या शायद मुझे ऐसा लगता था जैसा की हर लड़के को लगता है सो मैने भी उसे घूरना शुरू कर दिया ऐसा कई दिनों तक चला। एक दिन मै किसी काम से शोएब के घर गया मैंने बेल बजाई आंटी उपर दूसरी मंजिल पर थी उन्होंने बालकनी से नीचे देखा मै नीचे से चिल्लाया "आंटी शोएब है मै उसका दोस्त हूं उससे मिलना है" आंटी बोली "वो तो अपने मामा के गया है" मै ये सुनकर वहां से चलने लगा तो उन्होंने कहा "रुक जा पानी पी के जाइयो। दरवाजा खुला है अंदर बैठ जा" मैंने दरवाजा खोला और अंदर कुर्सी पर बैठ गया। आंटी ने आवाज दी "अरी शायदा शोएब का दोस्त आया है पानी पिला दे बेचारे को" मै "बेचारा" सुनते ही हसने लगा। मै दीवारें और पंखे को निहार रहा था तभी एक लड़की काले सूट सलवार मै आयी उसने गले मै काली चुन्नी लपेट रखी थी उसके हाथ मै ट्रे थी ज...