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Sohail part-3, that incident

मेरे साथ एक और घटना हुई। वो "शायदा" थी हम लोग एक ही कोचिंग में पढ़ते थे पर हमारा बैच अलग था मै अक्सर समय से पहले ही कोचिंग पहुंच जाया करता था शोएब भी मेरे साथ कोचिंग ही कोचिंग पढ़ता था शायदा अक्सर र्कोचिंग से निकलते समय  मेरी ओर देखा करती थी या शायद मुझे ऐसा लगता था जैसा की हर लड़के को लगता है सो मैने भी उसे घूरना शुरू कर दिया ऐसा कई दिनों तक चला। एक दिन मै किसी काम से शोएब के घर गया मैंने बेल बजाई आंटी उपर दूसरी मंजिल पर थी उन्होंने बालकनी से नीचे देखा मै नीचे से चिल्लाया "आंटी शोएब है मै उसका दोस्त हूं उससे मिलना है" आंटी बोली "वो तो अपने मामा के गया है" मै ये सुनकर वहां से  चलने लगा तो उन्होंने कहा "रुक जा पानी पी के जाइयो। दरवाजा खुला है अंदर बैठ जा" मैंने दरवाजा खोला और अंदर कुर्सी पर बैठ गया। आंटी ने आवाज दी "अरी शायदा शोएब का दोस्त आया है पानी पिला दे बेचारे को" मै "बेचारा" सुनते ही हसने लगा। मै दीवारें और पंखे को निहार रहा था तभी एक लड़की काले सूट सलवार मै आयी उसने गले मै काली चुन्नी लपेट रखी थी उसके हाथ मै ट्रे थी जिस पर ग्लास मै पानी रखा था। ये कोई और नहीं बल्कि शायद थी जो कि मेरे साथ कोचिंग मै पढ़ती थी इसी दिन मुझे पहली बार उसका नाम पता चला था उस देखकर मेरे चेहरे से हाव भाव उड़ गए थे मेरे मुंह से एक शब्द नहीं निकला मेरी ये हालात देखकर उसे भी हसी आ गई। मै भी मुस्कुरा दिया मैंने ग्लास उठाया पानी पिया और वहां से चलने लगा। मै गेट पर पहुंचा ही था तब वह खिल खिलाकर हसने लगी मै घर से बाहर निकल आया

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ख्वाब का मारना

आओ तुम्हें एक ख्वाब को मरता हुआ दिखाऊं। वह चढ़ जाएगा अपनी ही बनाई किसी इमारत की छत पर और कूद जाएगा ठीक वहीं जहां तुम खड़े हो वह ठीक तुम्हारे सामने दम तोड़ देगा। या फिर ले आएगा कहीं से उम्मीदों का जहर और उसे खा कर इधर-उधर भागेगा इस उम्मीद में कि तुम उसे बचा लो लेकिन ऐसा नहीं होगा वह छोड़ देगा अपने शरीर को ढीला और उसका शरीर नीला पड़ जाएगा। या फिर वह अपनी उलझन को समेट कर उससे एक रस्सी बनाएगा और उसे अपनी गर्दन में डालकर झूल जाएगा थोड़ा छटपटाएगा और फिर मर जाएगा। या फिर आएगी रिश्तों की एक गाड़ी और उसे सड़क पर अकेला चलता देख उसे कुचल देगी और वह उसके बोझ तले दबकर मर जाएगा। अगर ऐसा ना हुआ तो वह गुमनामी के अंधेरे में चुपचाप बैठे बैठे नाउम्मीदी से धीरे धीरे खुद ही मर जाएगा बिना शोर किए,बिना कुछ कहे जैसा कि होता आया है हर बार बार बार