पिछले कुछ दिनों से मुझे एक सपना बार - बार आ रहा है उस सपने में मै एक खाली जगह पर खड़ा हूं मेरे आस पास कोई भी नहीं हैं और एक रस्सी मेरे चेहरे के ठीक आगे लटक रही है उसमे एक फंदा भी बना हुआ है और मै उस रस्सी के फंदे में अपनी गर्दन डाल देता हूं रस्सी धीरे धीरे ऊपर की ओर खींचने लगती है और मेरे गले पर लगा फंदा कसने लगता है मै हवा में लटका हुआ हूं और इस सपने को देखते हुए मेरे शरीर में किसी प्रकार की हलचल नहीं होती मै बिना विचलित हुए बड़ी सहजता से खुद को मरते हुए देखता हूं।
आप ये सोच रहे होंगे कि मुझे ऐसे सपने क्यों आते है? तो मै आपको अपने बारे में कुछ बता दू ताकि आपको यह पता करने में आसानी हो कि मुझे ऐसे सपने क्यों आते है
मेरा नाम हर्षित है मेरी उम्र 20 वर्ष है मैने एक साल पहले ही बारहवी पास की है और पिछले एक साल से में खाली बैठा हूं आप सबकी ही तरह मुझे भी अपने कैरियर की चिंता है मैने बारहवी कॉमर्स (वाणिज्य) से की है और हर कॉमर्स के स्टूडेंट की तरह मेरे अंदर भी सी•ए करने की चाह थी पर ऐसा नहीं हो सका इसके बहुत सारे कारण थे और एक मुख्य कारण यह भी था कि मुझे सी•ए करना ही नहीं था यह बात मुझे थोड़ी देर से समझ आई असल में मुझे लिखना पसंद है पर यह मेरे पापा और मम्मी को भी नहीं पता क्योंकि मेरे पिताजी को लगता है कि लेखकों का कोई भविष्य नहीं होता लोग अक्सर मुझसे पूछते है कि क्या कर रहा है तो में उनको बोल नहीं पाता कि मै लिखता हूं क्योंकि उनकी नज़रों में लेखक किसी दूसरे ग्रह से आए हुए प्राणी की तरह होते है तब कई बार मुझे ऐसा भी लगता है कि कहीं मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी मुझे भी और बच्चो के साथ भेड़ चाल में सी•ए ही कर लेनी चाहिए थी
इस सब के बीच मेरी ज़िन्दगी में लड़की आई और लगभग मेरे हर दोस्त की ज़िन्दगी में कोई ना कोई लड़की आई। इस उम्र में शायद यह सामान्य है यह आकर्षण जो हमें एक दूसरे की ओर खीचता है इस बीच लोग पता नहीं क्या क्या सोच लेते है मैने भी सोचा। पर यह ज्यादा दिन नहीं चला। हर कहानी को एक न एक दिन सच्चाई के धरातल पर उतरना पड़ता है सो मेरे साथ भी यही हुआ।
साथ ही मै यह भी जानता हूं कि हर इंसान की ज़िन्दगी में कोई न कोई कठिनाई आती ही है और निरंतर आती ही रहेंगी और आपको अपने ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए इनसे मुखातिब होना ही पड़ेगा
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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