अक्सर ये वाक्या सुनने में आता है कि नाम में क्या रखा है ? मेरा एक दोस्त है श्याम चतुर्वेदी उसकी कहानी सुनकर आप अगली बार से नाम में क्या रखा है नहीं बोलेंगे जब उसका जन्म हुआ तो एक डॉक्टर इन ट्रेनिंग जिसका नाम श्याम था उससे श्याम चतुर्वेदी यानी मेरे दोस्त के डिस्चार्ज पेपर्स खो गए थे और उनके बिना उसको डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था जिस कारण उन्हें तीन दिन तक इंतजार करना पड़ा तीसरे दिन उसकी दादी के सब्र का बांध टूट गया जिस कारण उनकी श्याम से बहस हो गई श्याम ने समझाने कि कोशिश की पर दादी नहीं समझी और खीस में उन्होंने कहा कि जाओ तुम ही इसे रख लो इसे भी अपनी तरह ही बना लेना श्याम बना लेना तो इस तरह उसे अपना नाम मिला और बात रही उपनाम की तो उपनाम उसकी चॉइस नहीं थी। किसी की भी नहीं होती पर उसे अपने उपनाम से भी बहुत प्रेम और साथ ही गर्व भी था क्योंकि उसके हिसाब से चतुर्वेदी वे ब्राह्मण होते है जिन्हे चारो वेदों का ज्ञान होता है और इसी प्रकार त्रिवेदी और द्विवेदी वे ब्राह्मण होते है जिन्हे तीन और दो वेदों का ज्ञान होता है और इस बात का सबूत वो इन उपनामों के संधि विच्छेद करके देता था पर इस तरह तो एक वेद के ज्ञानी का नाम वेदी होना चाहिए पर ऐसा नहीं है खैर ये बात अब पुरानी हुई आज तो हर व्यक्ति खुद को चारो वेदों का ज्ञानी मानता है
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
Osm
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