चुनाव नज़दीक आ रहे है और हर बार चुनावों के साथ कुछ सवाल आते है उन्हीं सवालों मै से एक है।
लेफ़्ट पार्टीज हमेशा कहती है कि राइट विंग पार्टीज हिन्दू मजोरिटी को ध्रुवीकरण के जरिए अपने साथ कर लेती है बात सही है पर ऐसा क्यों होता है?
ऐसा इसीलिए है क्योंकि तथाकथित लेफ़्ट पार्टीज या विचारधारा के बड़े चेहरे जहां हिन्दू रूढ़िवादियों की कड़े शब्दों से निंदा करते हैं वहीं दूसरी ओर वे अपना वोटबैंक बचाने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति करते है।
मैं ऐसे कई लोगो से मिलता हूं जो स्वयं रूढ़िवादी है पर खुद को लिबरल बताते है क्योंकि लेफ़्ट आइडियोलॉजी के कई बड़े चेहरे इस्लाम की कमियों पर बोलने से डरते है या अपना लहजा इसके प्रति नर्म रखते है।
पर ऐसा क्यों होता है कि हम अपनी प्रतिक्रिया देने से पहले तथाकथित बड़े चेहरों की ओर देखते है हमे हमेशा गलत के खिलाफ बोलते रहना चाहिए और सही के साथ खड़े रहना चाहिए। ना की किसी सेलेब्रिटी या नेता का मुंह ताकना चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर हम उनके ट्रोल में शामिल हो जाते है
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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