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Dharm prachar

कुछ दिन पहले की बात है मेरी मुलाक़ात बौद्ध धर्म के एक धर्म प्रचारक से हुई। लोगो की भीड़ उनके चारो ओर लगी थी सो मैं भी उत्सुकता में वहां पहुंच गया और वहां एक खाट पर बैठकर उनकी बातें सुनने लगा। वो अपने धर्म का प्रचार करने के लिए दूसरे धर्मो को नीचा दिखाने लगे में उनकी इस बात से असंतुष्ट था तो मैंने उनसे कह दिया "ऐसा कौन सा धर्म है जिसमें कोई कमी नहीं है सभी धर्मो में कोई न कोई कमी होती है इसका मतलब ये थोड़ी ही है कि कोई अपना धर्म ही छोड़ दे बस जरूरत है तो उन कमियों को दूर करने की ना कि रूढ़िवादियों की तरह उनको पकड़ कर रखने की" मेरा जवाब उपयुक्त था मैने उनकी ओर से प्रतिक्रिया चाही तो जवाब मै उन्होंने पूछा तुम हिन्दू हो न। जाती क्या है तुम्हारी? मैंने जवाब दिया - मै जाती में विश्वास नहीं करता और वहां से चल दिया।
पर कुछ दूर आगे जाने के बाद मुझे लगा शायद आपको भी लगता हो (क्या 21वी सदी में आकर भी हमे जाती या धर्म की सही में कोई जरूरत है? या इसके पीछे हम फ़िज़ूल में ही लड़ रहे है?)

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ख्वाब का मारना

आओ तुम्हें एक ख्वाब को मरता हुआ दिखाऊं। वह चढ़ जाएगा अपनी ही बनाई किसी इमारत की छत पर और कूद जाएगा ठीक वहीं जहां तुम खड़े हो वह ठीक तुम्हारे सामने दम तोड़ देगा। या फिर ले आएगा कहीं से उम्मीदों का जहर और उसे खा कर इधर-उधर भागेगा इस उम्मीद में कि तुम उसे बचा लो लेकिन ऐसा नहीं होगा वह छोड़ देगा अपने शरीर को ढीला और उसका शरीर नीला पड़ जाएगा। या फिर वह अपनी उलझन को समेट कर उससे एक रस्सी बनाएगा और उसे अपनी गर्दन में डालकर झूल जाएगा थोड़ा छटपटाएगा और फिर मर जाएगा। या फिर आएगी रिश्तों की एक गाड़ी और उसे सड़क पर अकेला चलता देख उसे कुचल देगी और वह उसके बोझ तले दबकर मर जाएगा। अगर ऐसा ना हुआ तो वह गुमनामी के अंधेरे में चुपचाप बैठे बैठे नाउम्मीदी से धीरे धीरे खुद ही मर जाएगा बिना शोर किए,बिना कुछ कहे जैसा कि होता आया है हर बार बार बार