कुछ दिन पहले की बात है मेरी मुलाक़ात बौद्ध धर्म के एक धर्म प्रचारक से हुई। लोगो की भीड़ उनके चारो ओर लगी थी सो मैं भी उत्सुकता में वहां पहुंच गया और वहां एक खाट पर बैठकर उनकी बातें सुनने लगा। वो अपने धर्म का प्रचार करने के लिए दूसरे धर्मो को नीचा दिखाने लगे में उनकी इस बात से असंतुष्ट था तो मैंने उनसे कह दिया "ऐसा कौन सा धर्म है जिसमें कोई कमी नहीं है सभी धर्मो में कोई न कोई कमी होती है इसका मतलब ये थोड़ी ही है कि कोई अपना धर्म ही छोड़ दे बस जरूरत है तो उन कमियों को दूर करने की ना कि रूढ़िवादियों की तरह उनको पकड़ कर रखने की" मेरा जवाब उपयुक्त था मैने उनकी ओर से प्रतिक्रिया चाही तो जवाब मै उन्होंने पूछा तुम हिन्दू हो न। जाती क्या है तुम्हारी? मैंने जवाब दिया - मै जाती में विश्वास नहीं करता और वहां से चल दिया।
पर कुछ दूर आगे जाने के बाद मुझे लगा शायद आपको भी लगता हो (क्या 21वी सदी में आकर भी हमे जाती या धर्म की सही में कोई जरूरत है? या इसके पीछे हम फ़िज़ूल में ही लड़ रहे है?)
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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