लंच की घंटी बजी सभी बच्चे क्लासरूम से बाहर की ओर दौड़ गए। क्लास मै हम तीन रुके हुए थे। हर्ष, सोहेल, और मै (सोनू) हम तीनों एक डेस्क पर बैठ गए हर्ष मेरी दाई ओर बैठा और सोहेल मेरी बाई ओर। हम तीनो ने अपना लंचबॉक्स निकाला
सोहेल: खाएगा?( अपना लंच मेरी ओर खिसकाते हुए)
मै: नहीं मै मंगलवार को नॉन वेज नहीं खाता
सोहेल: क्यों तेरा भगवान सिर्फ मंगलवार शनिवार ही देखता है?
मैंने उसे हसकर टाल दिया
हर्ष: तुझे सिर्फ दूसरे धर्मो में ही कमियां दिखाई देती हैं जैसे तेरा धर्म तो एकदम परफेक्ट है
सोहेल: वो तो है ही
हर्ष: ये तेरी गलतफहमी है। पूरी दुनिया जानती है तुम्हारे बारे में।
मैने बीच मै चिल्लाना शुरू कर दिया और बात को पलटने की कोशिश की
मै: सोहेल तूने बिजनेस किसमें लिया है
सोहेल: मतलब
हर्ष: भाई! लैंग्वेज हिंदी या इंग्लिश?
सोहेल: इंग्लिश
हर्ष: पर तुझे इंग्लिश कहा आती है?
सोहेल: तो टीचर को कौन सा आती है
हम तीनो ठहाके मारकर हसने लगे।
मै: भाई ये नया वाला टीचर अलग है
सोहेल: भाई सारे टीचर एक जैसे ही होते है
हर्ष: तू बेवजह डर रहा है
लंच ख़त्म हुआ बच्चे क्लासरूम मै वापस आ गाए। पीरियड बिजनेस वाले सर का था वह क्लास मै आए और बोर्ड पर चाक से मैनेजमेंट लिख दिया। बोले आज हम मैनेजमेंट यानी प्रबंधन के बारे मै पढ़ेंगे।उन्होंने सोहेल की ओर इशारा करके उसे खड़ा किया।
टीचर: मैनेजमेंट क्या होता है?
सोहेल: सर प्रबंधन वह प्रक्रिया है...
टीचर ने सोहेल को बीच में रोका और पूछा: किस लैंग्वेज मै लिए हो?
सोहेल: सर इंग्लिश
टीचर: तो इंग्लिश में बताओ
हम तीनो ने एक दूसरे की ओर देखा और हसने लगे
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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