रात के लगभग 10:30 बज रहे थे पिताजी बेड पर लटेकर टीवी देख रहे थे और मां किचन में बर्तन धो रही थी और मैं ऊपर अपने कमरे में लेटा हुआ था तभी घर की बेल बजी पापा उठकर गेट खोलने चले गए गेट खोलते ही चार पांच लोग घर में घुस गए और पापा को मारने लगे उनमें से कुछ लोग घर के अदंर घुस गए और मां को भी पीटने लगे मै शोर सुनकर बाहर निकला मै सीढियो पर पहुंचा ही था की उनमें से एक आदमी मेरी ओर दौड़ा उसके हाथ मै एक डंडा था।मै दौड़कर अपने रूम मै पहुंचा और दरवाजा बंद कर लिया वे लोग मम्मी पापा को मार रहे थे।वे दोनों खूब चिल्ला रहे थे मै उनके पास जाकर उन्हें बचाना चाहता था पर मुझे डर लग रहा था फिर उन लोगो ने घर में आग लगा दी और वाहा से भाग गए
वेलकम होम ये उस हॉस्पिटल का नाम है जहां मुझे भर्ती किया गया था। घर म आग लगने के बाद मै बेहोश हो गया था रंजीत अकंल मुझे हॉस्पिटल लकेर आए थे रंजीत अकंल मेरे पड़ोसी है वह मेरे घर के ठीक सामने रहते है उन्होंने मुझे बताया कि मेरे दादा जी गांव से मुझे लेने आ रहे थे मैने उनसे पूछा क्यों मम्मी पापा कहा है तो उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया।अब मेरे मन में बहुत सारे विचार आ रहे थे। मैने उनसे पूछा क्या हुआ मम्मी पापा को? उन्होंने मुझे सब कुछ बता दिया उन्होंने बताया कि वो पापा मम्मी को लेकर हॉस्पिटल भी आए थे पर हालत ज्यादा खराब होने की वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका मैने उसके बाद उनसे कुछ नहीं पूछा मै चुप चाप घर आ गया। उन्होंने रास्ते भर मुझे खूब समझाया पर मैने कुछ नहीं सुना रात के लगभग ढाई बज रहे थे उन्होंने मुझे अपने घर में सोने को कहा पर मैंने कुछ नहीं कहा और अपने घर चला गया अंकल ने मुझे जाने दिया मै घर की ओर चल दिया घर की दीवारें धुएं से काली हो गई थी मैं अपने रूम मै गया और बेड पर बैठ गया अब मेरी आखो से आंसू निकालने लगे मेरा मन चिल्लाने को कर रहा था पर मुझसे चिल्लाया नहीं गया लगभग 15 मिनट तक रोने के बाद मेरा मन हल्का हो गया मै लेट गया मेरे मन में एक सवाल तैर रहा था कि वो लोग आखिर कौन थे? मै ये सोचते सोचते अपने बचपन की और चला गया अक्सर मेरे साथ ऐसा होता है कि जब भी किसी चीज के बारे मै सोचता हूं तो मेरा ध्यान भटककर कहीं और चला जाता है।
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