मै एक स्कूल में था पापा मेरे साथ है मेरी उम्र लगभग पांच साल थी हम प्रिंसिपल के कमरे में बैठे थे एडमिशन की सारी बाते हो चुकी थी प्रिंसिपल ने मुझे बुलाया
प्रिंसिपल: तुम्हारा नाम क्या है?
मै: साहिल
प्रिंसिपल: अच्छा! और पापा का?
मै: शमशाद
प्रिंसिपल: बहुत अच्छा।और मम्मी का नाम?
मै: चंचल
प्रिंसिपल कुछ देर के लिए शांत हो गए उसके बाद उन्होंने पापा के साथ कुछ बात की और मेरे एडमिशन के लिए मना कर दिया मैंने इसी तरह कुछ स्कूलों के चक्कर लगाए पर कहीं बात नहीं बनी अंत मै मेरा एडमिशन एक मिशनरी स्कूल मै हो गया यह के हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे यह मेरा एक दोस्त बना "सूरज" हम दोनों एक साथ बैठते थे लंच भी सरे क्या करते थे मै एक दिन उसके घर गया उसकी मम्मी ने मुझसे मेरे पापा का नाम पूछा मैने नाम बताया। नाम सुनने के बाद उन्होंने अजीब सा बर्ताव करना शुरू कर दिया उन्होंने मुझे नाश्ता दिया। मै और सूरज एक ही प्लेट से खाने लगे तो उन्होंने सूरज को डाटा और अलग प्लेट लाकर दिया मैने उनसे कहा "आंटी हम तो एक दूसरे के साथ लंच भी शेयर कर लेते है"अगले दिन जब मै स्कूल गया तो सूरज मुझसे अजीब बर्ताव कर रहा था पहले वह अलग डेस्क पर जाकर बैठ गया और जब मै उसके पास जाकर बैठ तो उसने मुझे बैठने से मना कर दिया। लंच टाइम हुआ। मै जाकर उसके साथ बैठ गया वेह फिर दूर हट गया। पूछने पर उसने बताया कि उसकी मम्मी ने उसे मेरे साथ रहने से मना किया था। एक चीज और इन सब पहले मै मदरसे जाया करता था पर कुछ दिनों में ही मम्मी ने मुझे मदरसे से निकलवा दिया क्योंकि एक दिन मैने मम्मी से पूछा "मम्मी हम कौन है?" क्योंकि वहां हमें धर्म के हिसाब पहचान दी जा रही थी और मै उनके खाचे मै फिट नहीं बैठता था या ये कहें की मै उनके लिए काफिर था
इन सब के अलावा भी मेरी आसपास कई चीजे घट रही थी जैसे घर मै आए दिन मम्मी पापा के बीच होने वाली लड़ाइयां और इन लड़ाइयों का केन्द्र थी अन्नू आंटी। एक बार तो झगड़ा इतना बढ़ गया कि पापा ने आधी रात को अन्नू आंटी को फोन लगाकर मम्मी से बात करवाई। कुछ दिन बाद पापा ने वहा से काम छोड़ दिया अन्नू आंटी पापा के साथ उनकी कंपनी में काम करती थी मै उनसे कई बार मिला था उनका व्यवहार मेरे प्रति सकारात्मक था वह और लोगो की तरह नहीं थी वो मेरे साथ खूब खेला करती थी और मेरा ध्यान भी रखती थी उनके दो बच्चे थे वो दोनो भी मेरे साथ खूब खेला करते थे मै अक्सर उनके घर जाया करता था पापा मम्मी को ये बताने से मना करते थे कि हम अन्नू आंटी के घर जाया करते थे
मैं चाहता हूं... हंसना खिल खिलाकर और साथ ही चाहता हूं खुलकर रोना भी मैं चाहता हूं दौड़ना तेज सभी से और साथ ही चाहता हूं चलना धीरे... बहुत धीरे मैं चाहता हूं सभी उलझने पल मे सुलझा ...
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